सुनिए संविधान की अनोखी कहानी,

डॉ० अंबेडकर द्वारा लिखी जुबानी।

2 वर्ष 11 महीने 18 दिन में संपूर्ण हुआ,

26 जनवरी 1950 में भारत में लागू हुआ।

395 अनुच्छेदों में यह गढ़ा हुआ,

22 भाग व 12 अनुसूचियों में बटा हुआ।

कई वीर पुरुषों की इसमें कुर्बानी है,

बहुत अनोखी संविधान की कहानी है।

शासन-प्रशासन के अधिकार, 

कर्तव्य सब कुछ इसमें कहे गये हैं।

जनता नागरिक के अधिकार भी, 

सब कुछ इसमें शामिल किये गये हैं।

सबको स्वतंत्रता है जीने की, सब आजाद हैं,

संविधान के कारण, भारत देश आबाद हैं।

सबसे बड़ा संविधान भारत में लिखा गया,

विश्व का सबसे बड़ा संविधान इसे कहा गया।

कई देशों से चुन-चुन कर ली गई है,

जनता की भलाई की हर बात इसमें कही गई है।

संविधान की कुछ विशेषताएँ भी सुन लें,

संघात्मक भी है, एकात्मक भी इसको कह लें।

विकट परिस्थिति जब देश पर आती है,

विशाल रूप में संविधान एकात्मक बन जाती है।

शोषण करने का है किसी को अधिकार नहीं,

अधिकारों का हनन हो, ये संविधान को स्वीकार नहीं।

फिर भी संविधान देखो आज बिलख रहा है,

देश की हालत देख कर बिखर रहा है।

संसद भवन में जाकर रो पड़ा है,

जनता प्रशासन के बीच वह मौन खड़ा है।

सारी बात तो संविधान से ही अपनाई जाती है,

फिर संविधान क्यों रूठी दिखाई देती है ?

संस्कृति और शिक्षा की है अभी भारत में कमी, 

कहो संविधान में क्या रह गई कहीं कमी ?

पूर्ण शिक्षित नहीं अभी भारत की ज़मीं,

कुप्रथा व आडंबरों से तप रही भारत की भूमि।

मुस्कुराते संविधान की छिपी आँसुओं की रवानी,

कुछ ऐसी है संविधान की अनोखी कहानी।

 

by :जयपूर्णा विश्वकर्मा